झारखंड के गढ़वा जिले से पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। गढ़वा के लोकल रिपोर्टर विकास साहू के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई। आरोप है कि उन्हें नामधारी कॉलेज के पास एक विज्ञापन दिलवाने के बहाने बुलाया गया और फिर वहां पहले से मौजूद 8 से 10 लोगों के एक समूह ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया।
क्या है मामला
गढ़वा जिले में कन्या विवाह योजना से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा सामने आया है। इस स्कैम का पर्दाफाश विकास साहू के जरिए हुआ, जिससे योजना में हुई अनियमितताओं और फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं।
पीड़ित पत्रकार विकास साहू के मुताबिक, हमलावरों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और लाठियों से ताबड़तोड़ पिटाई की। मारपीट इतनी गंभीर थी कि उनके कपड़े फाड़ दिए गए, और उनके मुंह व पैरों से खून बहने लगा।
मदद की आस में कई किलोमीटर दौड़ा पत्रकार
इस पूरी घटना का सबसे परेशान करने वाला पहलू यह है कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विकास साहू को किसी भी राहगीर से मदद नहीं मिली। साहू का दावा है कि वह जान बचाने के लिए कई किलोमीटर तक दौड़ते हुए पुलिस स्टेशन पहुंचे, लेकिन रास्ते में किसी ने भी रुककर उनकी मदद नहीं की।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ उन पर हमला नहीं था, बल्कि मानवता और समाज की संवेदनहीनता का भी आईना है। सवाल यह है कि जब एक घायल पत्रकार मदद के लिए तड़प रहा था, तब कोई आगे क्यों नहीं आया?
सिस्टम की नाकामी पर उठे सवाल
विकास साहू ने इस घटना को लेकर प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते सुरक्षा और सहायता मिलती, तो इतनी गंभीर स्थिति पैदा ही नहीं होती।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सच दिखाने वाले लोग आज सुरक्षित हैं? और क्या आम नागरिकों का सिस्टम से भरोसा खत्म होता जा रहा है?
पत्रकारिता पर हमला, लोकतंत्र पर हमला
इस मामले में अब जरूरत है कि प्रशासन पूरी निष्पक्षता के साथ जांच करे, दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी पत्रकार इस तरह के हमले का शिकार न बने।
यह घटना न सिर्फ एक पत्रकार की पीड़ा की कहानी है, बल्कि समाज, सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।
